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मित्रो! पाठकनामा में आज प्रस्तुत है कथाकार वंदना देव शुक्ल की चर्चित वागर्थ में प्रकाशित कहानी ''मशीन'' जिसका बहुत कम समय में कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
वंदना देव शुक्ल
BSc ,M.A. (Hindi /Music) ,B ed ,Dipl.- Food & Nutrition ,Research scholar वंदना शुक्ल की पहली कहानी ‘’उड़ानों के सारांश’’ भी
वागर्थ में ही २०१० में ही प्रकाशित हुयी थी उसके बाद लगातार पहल, तद्भव,
नया ज्ञानोदय,हंस व् कथादेश सहित हिन्दी की लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र –
पत्रिकाओं में कहानियां /लेख प्रकाशित हो रहे हैं। ‘’उड़ानों के सारांश’’
कहानी संग्रह तथा ‘’मगहर की सुबह’’ उपन्यास प्रकाशित होने के अलावा एक
कहानी संग्रह शीघ्र ही आनेवाला है। आकाशवाणी व् रंगमंच कलाकार |प्रेमचन्द
की तीन कहानियों का नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन करनेवाली वंदना शुक्ल की
कहानियों का तमिल,उड़िया,उर्दू ,पंजाबी ,कन्नड़ ,गुजराती तथा अंगरेजी भाषा
में अनुवाद| हाल ही में तीन कवितायेँ क्रोयेशिया विश्वविध्यालय के इंडोलोजी
पाठ्यक्रम में शामिल की गयी हैं। पटियाला की एक शोध छात्रा द्वारा
कहानियों पर शोध कार्य भी किया जा रहा है।
वंदना जी कमलेश्वर स्मृति कहानी लेखन (मुम्बई),बी एस ऍफ़ इण्डिया द्वारा
आयोजित ‘’सरहद की कहानियाँ’’ (देहली ) , शब्द निष्ठां सम्मान /पुरस्कार /
(अजमेर),कथादेश एवं सर्नुनाह के संयुक्त तत्वावधान में रहस्य कथा पुरस्कार
,कादम्बिनी कथा लेखन पुरस्कार से सम्मानित हैं तथा भोपाल, मध्यप्रदेश में शिक्षिका पद पर आसीन हैं।
Email – shuklavandana46@gmail.com
मशीन (कहानी) - वंदना देव शुक्ल
नाम – इस्नावती (तस्वीर )
देश –इंडोनेशिया
उम्र -इकत्तीस वर्ष
हाईट-४ फीट दो इंच
स्वास्थ्य –सामान्य
पारिवारिक स्थिति-मैरीड
एक बच्चा उम्र चार वर्ष इंडोनेशिया मेंरिश्तेदार के संरक्षण में
काबीलियत–(ग्रेड)
कुकिंग-बहुत अच्छी ए
स्वभाव–हंसमुख /धैर्यशील ए
अंगरेजी ज्ञान–काम चलाऊ सी
विशेषता विश्वसनीय ए
अनुभव तीन वर्ष सऊदी अरेबिया में बेबी सिटिंग के लिए एक परिवार में रही
इस बायोडाटा की बगल में एक दुबली पतली सी स्त्री का मुस्कुराता हुआ फोटो लगा था |
रिशा और अमित ने कंप्यूटर पर तमाम मेड एजेंसियां खंगालने और बायोडाटा देखकर इसे भी शोर्ट लिस्ट किया और अंत में सलाह मशविरा कर इसे यानि इस्नावती को फाइनल कर दिया |रिशा अमितदौनों सिंगापुरकी एक कंपनी में इंजीनियर हैं और अब रिशा को एक माह बाद डिलीवरी होने वाली थी |एजेंसी के माध्यम से बेबी सिटिंग के लिए मेड रखना विशेषतौर पर गर्भवती वर्किंग वूमेन के लिए यहाँ आम बात है | इंडिया में तो ऐसे टाईम में माँ या सास या रिश्ते की कोई महिला आ जाती है या फिर दिन भर के लिए कोई मेड रख ली जाती है लेकिन विदेशों में ये संभव नहीं |दूसरे देशों की मेड कम से कम दोगुनी ज्यादा कीमत पर बुलाई जाती हैं | कुछ स्वाभाविक दिक्कतों से बचने के लिए आर्थिक रूप से समर्थ दंपत्ति लोकल की अपेक्षा एजेंसी के माध्यम से विदेशी मेड लेना ही पसंद करते हैंलिहाजा एजेंसी में अनुबंध के अनुसार उसकी फीस जमा करा दी गयी जो जाहिराना तौर पर काफी मोटी रकम थी|जब से मेड को ‘फाईनल’’ किया थाअमित और रिशा इस अपरिचित मेड के स्वभाव आदतों रहन सहन पर काफी बात करते थे और कभी २ ये सोचकर चिंतित भी हो जाया करते कि बुला तो लिया है उसे दूसरे देश से बिलकुल अनजान उस पर मुस्लिम समुदाय की महिला पता नहीं कैसी होगी ?
एक आइडिया ....हिडन कैमरा लगवा लेते हैं |कम से कम ऑफिस में बैठकर देख तो पायेंगे कि ये कैसे रख रही है बच्चे को ?अमित ने कहा और उसी वक़्त उसे ऑर्डर भी कर दिया गया |
नियत तिथि पर वो दौनों अपनी नई मेड इस्नावती को लेने एजेंसी ऑफिस में बैठे थे |ये काफी भव्य बिल्डिंग थी जिसमे होस्टल भी था |आवश्यक लिखा पढी करने के बाद एजेंट ने इस्नावती को बुलाया |वो छोटे कद की दुबली पतली हंसमुख महिला थी |छोटी आँखें ,पतला औए लंबा चेहरा ,दांत कुछ आगे निकले और बड़े से |उसने झुककर रिशा अमित का अभिवादन किया |एजेंट ने उसे उसी की भाषा में समझाया ‘’यही हैं तुम्हारे मालिक अगले दो साल इनके यहाँ रहना है तुम्हे ‘’उसने हाँ में सर हिलाया |
उसके बाद एजेंट ने अमित से अंगरेजी में कहा ’’सर मुझे आशा है कि आपने इसकी क्वालितीज़ वेब साईट पर पढ़ ही ली होंगी और ये हमारी नियमावली कार्ड है इसे आप अभी पढ़ लीजिये और यदि सहमत हैं तो नीचे अपने हस्ताक्षर कर दीजिये |
नियम इस प्रकार थे
(1)-आपके घर में इसके लिए एक अलग कमरा होना चाहिए|
(2)-दोपहर में इसे रेस्ट के लिए दो घंटे देना ज़रूरी है |
(3)-वीक में एक दिन का अवकाश जिसमे ये कुछ काम नहीं करेगी |
(4)-यदि देश से बाहर जाएँ तो उतने दिन के लिए आप इसे यहीं एजेंसी होस्टल में छोड़ सकते हैं |
(5)-आप तीन माह का पेमेंट हर तीसरे महीने एजेंसी में डिपोजिट करेंगे लेकिन इसे एक पैसा भी नहीं देंगे |यदि देते हैं तो ये आपकी ज़िम्मेदारी होगी |एजेंसी उस पैसे को नहीं लौटाएगी |इसे जब ज़रुरत होगी ये आपके माध्यम से हमसे खर्चा मांगेगी |
(6)-जब दो साल बाद इसका अनुबंध आपके यहाँ से समाप्त होगा तब इसका साल का पूरा बकाया पैसा एजेंसी दे देगी |
(7)-आप इसे मोबाईल /इंटरनेट प्रोवाइड नहीं करेंगे और इसका पालन बहुत कडाई से करेंगे |ये व्यवस्था आप लोगों की सुरक्षा के मद्देनज़र की गयी है |और यदि आप ऐसा करते हैं तो एजेंसी पर इसकी कोई ज़वाबदेही नहीं होगी |
(8)-यदि अनुबंध समय पूरा होने के बीच में आपको इससे कोई परेशानी होती है तो आप हमें तुरंत फोन या मेल कर सकते हैं और उस स्थिति में इसका अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा|
(9)- हर एक महीने में छः माह तक हमारा एक आदमी आपके यहाँ आयेगा और इससे रिपोर्ट लेगा |यदि इसे कोई परेशानी है आपसे तो उसे तुरंत वापस बुला लिया जाएगा और शेष फीस भी आपको लौटाई नहीं जायेगी |
(10)-इसकी घरेलू सुविधाओं के अतिरिक्त इसकी सभी व्यक्तिगत ज़रूरतें जैसे कपडे या कोई रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने के लिए एजेंसी इसकी तनख्वाह में से देगी |
मेड इस्नावती को भी सभी नियम समझा दिए गए हैं व् हस्ताक्षर ले लिए गए हैं |हमें उम्मीद और यकीन है कि आप हमारे नियमों का उतना ही ख्याल रखेंगे जितना हमारी ये वर्कर आपका रखेगी|
गुड लक ’’
अमित ने उस अग्रीमेंट पर अपने साइन कर दिए |
इस्ना के पास एक बड़ा सूटकेस और दो बैग्स थे |उसने घुटने तक लम्बी गहरे नीले रँग की निकर और ऊपर गहरे लाल रंग का टॉप पहन रखा था |कंधे पर एक छोटा पर्स टंगा था |वो कहीं से भी चार साल के बेटे की माँ नहीं लग रही थी बल्कि उसकी कद काठी से तो वो मैरीड ही नहीं लग रही थी |कार में कुछ देर बातें करते हुए अमित रिशा को ये अंदाज़ हो गया था कि लडकी बहुत कम अंग्रेज़ी बोल और समझ पाती है वो सिर्फ अरेबियन या इंडोनेशिया की भाषा बोल पाती है |इस्ना कार में काफी संकोच में और सिकुड़ी हुई सी बैठी रही |
घर पहुंचकर उसे उसका कमरा दिखा दिया गया जो किचिन से लगा हुआ ही था अमित रिशा ने उसे पहले ही सुविधापूर्ण बना दिया था ताकि मेड को रहने में कोई दिक्कत न ही |उसके छोटे कमरे में एक लोहे का रैक .एक कुर्सी एक मेज़ और एक बिस्तर पड़ा था |उस कमरे में ए सी नहीं था इसलिए वहां एक स्टेंड फैन रख दिया गया था |इस्ना ने कमरे को पहले अच्छी तरह देखा फिर अपना सामान सूटकेस वगेरा रैक में जमा दिया |उसके बाद वो बाथरूम में घुस गयी |नहाकर जब लौटी तो उसके चेहरे से थकान उतर चुकी थी और अब वो निश्चिन्त और फ्रेश लग रही थी |अब उसके चेहरे से वो डर और संकोच की छाया गायब हो चुकी थी जो एजेंसी में पहली बार अपने ‘’मालिकों ‘’ को देखकर आ गयी थी | अमित और रिशा के बेहद आत्मीय स्वभाव और केयर ने उसे और भी आत्म विशवास से भर दिया |
‘’मदम, व्हाट फ़ूड यु विल ईट’’उसने अटकती हुई अंग्रेज़ी में रिशा से पूछा |
रिशा को उसकी अंग्रेज़ी और भोली सी सूरत देखकर हंसी आ गयी |
व्हाटेवर ..जस्ट सी व्हाट इज़ इन द फ्रिज फर्स्ट..
ओके ओके ..उसने कहा और किचिन में चली गयी |थेंक् गॉड शी अंडरस्टेंड्स इंग्लिश ...रिशा मन ही मन बुदबुदाई
इस्ना अर्ली राइज़र थी यानी मुहं अँधेरे ही उठ जाती | रिशा और अमित जैसे ही उठते टेबल पर चाय दूध और नाश्ता बनाकर रख देती |पहले शुरू में तो रैपरमें कच्ची सब्जियां रैप करके या सैंडविच ऑमलेट जैसी चीज़ें बनाती थी लेकिन जब रिशा ने उसे दोसा इडली सांभर ,रोटी सब्जी आदि बनाने सिखा दिए फिर तो वो ऐसे एक्सपर्ट हो गयी जैसे ये शुरू से ही इन्हें बनाना जानती थी |उसकी साफ़ सफाई,फुर्ती,बहुत शौक से खाना बनाना और टेबल पर सजाना वो भी मुस्कुराते हुए आश्चर्यजनक था | कभी २ अमित कहता भी ‘’ओ गॉड, ये औरत है या मशीन ...चलती ही रहती है बंद ही नहीं होती?’’इस्ना के पास एक रजिस्टर था जिसमे वो रिशा द्वारा बताई गयी सब रेसिपी लिखती जाती थी |मसालों व् अन्य खाध्य पदार्थों सब्जी आदि को देखकर उनका नाम अपनी भाषा में लिखती थी | वो गर्भवती रिशा के खान पान का विशेष ख्याल रखती ‘’नो मदम ये पाईनेपल सूप पियो...अभी पियो..प्रेग्नेंट लेडी को सूप और फ्रूट्स खूब खाने चाहिए |...ये कम कुक किया ग्रीन वेजीटेबल है .बहुत फायदेमंद है बेबी के लिए पहले इसे खाओ ...वो रिशा को आदेश देती | स्टोर से सब्जी फल वगेरह खरीदने भी अब वो खुद ही जाती |वैसे तो कई खूबियाँ थीं उसमे लेकिन एक खूबी जो इश्वर प्रदत्त ही थी वो थी उसकी किसी चीज़ को याद रखने और सीखने की अद्भुत क्षमता | अब ज़ल्दी ही वो अरबी भाषा को भूलकर अंग्रेज़ी सीखने और बोलने लगी |
‘’इस्ना तुम जब हमें खिलाने के बाद खाती हो तो किचिन के कोने में क्यूँ खाती हो .यहीं डाईनिंग टेबल पर खाया करो ना ?रिशा ने उससे कहा
नो मदम ..ऐसा हम नहीं कर सकते ..हमें यहीं खाना होता है
लेकिन उन लोगों को क्या पता कि तुम कहाँ खा रही हो ,जब हम कह रहे हैं तुमसे...
हाँ आप ठीक कह रही हैं कि वो यहाँ मौजूद नहीं लेकिन हमें तो ऑनेस्ट होना चाहिए न अपने प्रोफेशन में ? वो हाथ में छोटी सी तश्तरी और उसमे चिड़िया जैसा ज़रा साखाना लेकर खाती |खाने का उसे ज़रा भी लालच नहीं था |
‘’अमित मैं सोचती हूँ इस लडकी का बिलकुल मन नहीं करता क्या खाने का जब हम लोग इतना अच्छा तरह तरह का नाश्ता करते हैं जो ये खुद हमें बनाकर देती है?क्या कभी भी इसे ये देखकर भूख नहीं जगती ?
हाँ ये मैं भी सोचता हूँ ..सच बताऊँ रिशा ,ये इतने स्नेह से खिलाती है खाना और ऐसा हम लोगों का ख्याल रखती है कभी कभी मुझे मम्मी की याद आती है |अमित कुछ उदास हो गया |
एक माह बाद
एक प्यारी गोल मटोल बेटी को रिशा ने जन्म दिया |अमित और रिशा के घर में खुशी खुशबू बनकर तैरने लगी |पूरा घर बच्चे की किलकारियों से खिल उठा अब इस्ना का काम और बढ़ गया |वो बच्चे को निहलाने साफ़ सफाई से लेकर उसे सुलाने और रात में यदि वो जाग जाए तो उसे घुमा घुमाकर बहुत आत्मीयता से सुलाती थी |बेबी उसकी गोद पहचानती थी |रिशा का काम सिर्फ बेबी को फीड भर कराना था बाकी सभी काम इस्ना करती |
‘’कितने करीने और फुर्ती से करती हो तुम बच्चे के सारे काम ?उसे मसाज़ देना,नहलाना , उसकी पौटी साफ़ करना ,इतने छोटे बच्चे को कपडे बदलना क्या इसकी भी ट्रेनिंग मिलती है तुम्हे ?एक दिन रिशा ने उससे पूछा
मदम,माँ को अपने बच्चे की केयर करने के लिए किसी ट्रेनिंग की ज़रुरत है क्या? उसने मुस्कुराकर कहा
तुम्हारे भी एक बच्चा है न ? रिशा ने पूछा
इस्ना कुछ देर चुपचाप काम करती रही जैसे सोच रही हो कि पर्सनल बातें करना तो एजेंसी के नियमों के विरुद्ध है !फिर बहुत धीरे से उसने कहा
हाँ है..एक बेटा चार साल का ..कहते हुए वो कुछ उदास हो गयी
इंडोनेशिया में किसके पास रहता है ..हजबेंड के पास ही रहता होगा ?
नहीं मैडम ..वो मेरी एक रिश्ते की बहन और उसके हज़बेंड के साथ रहता है
क्यूँ हजबैंड के पास क्यूँ नहीं ?
वो अच्छा आदमी नहीं
मतलब?
उसने मेरी छोटी बहन को बहला फुसलाकर प्रेम किया और अब उसके एक बच्चा है |मेरी बहन बहुत इन्नोसेंट और गुड लुकिंग है |यदि मैं वहां से नहीं जाती तो मेरी बहन को वो अपने साथ नहीं रखता और मेरे माता पिता और बहन की बहुत बदनामी होती उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो जाती इसलिए मैंने घर छोड़ दिया |
बच्चा पढता है तुम्हारा ?
हाँ ..उसकी आँखों में चमक आ गयी बोली ‘’मैंने अपनी बड़ी बहन और जीजा जी से कह दिया है कि इसे खूब अच्छे स्कूल में पढ़ाएंजिसमे बड़े लोगों के बच्चे पढ़ते हैं | पैसे की चिंता बिलकुल न करें |उनके अपने भी दो बच्चे हैं |..सच बताऊँ मदम मैं अपने उस बच्चे को खूब पढ़ाना लिखाना चाहती हूँ या कोई दूकान खुलवाना ताकि उसके लिए आगे रोजी रोटी की प्रोब्लम ना आये | सिंगल पेरेंट होना बहुत मुश्किल है मदम वो भी ज्यादा पढ़ा लिखा या हुनरमंद न होना |
लेकिन इस्ना तुमसे ये किसने कहा कि तुम हुनरमंद नहीं हो?तुम्हारे अन्दर जो क्व़ालिटीज़ हैं वो बहुत कम लोगों में होती हैं रिशा ने उसकी तारीफ़ की
सुनकर वो शर्मा गयी ...मदम ,मैं अपने बच्चे को आप लोगों जितना पढ़ा लिखा देखना चाहती हूँ |आप तो जानती ही हैं पढ़ाई में कितना पैसा खर्च होता है |हमारे कंट्री की करंसी का भी बहुत बुरा हाल है आप जानती ही होंगी ?
रिशा उसकी और आश्चर्य से देखती रह गयी
अच्छा ..अब तुम्हारा बच्चा कौन सी क्लास में है रिशा ने पूछा
पता नहीं ...जब छोड़ा था तो प्ले स्कूल जाता था
क्यूँ पता नहीं ?
...क्यूँ कि मैं उसे एक साल का छोड़कर एजेंसी में काम करने लगी थी और सऊदी अरब के एक परिवार में मैंने तीन साल तक नौकरी की |उस वक़्त मेरी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी |वो मुझे छोड़ना नहीं चाहते थे लेकिन मैं उनके यहाँ नहीं रहना चाहती थी |वो पठान लोग थे और बहुत अजीब परिवार और रहन सहन था उनका | तीन साल में एक बार भी मैं अपने परिवार अपने बच्चे से बात नहीं कर पाई |उनके यहाँ बहुत से फेमिली मेंबर थे और उनका बिहेवियर भी अच्छा नहीं था लेकिन मैंने एजेंसी से शिकायत नहीं की |फिर पैसा कहाँ से आता ?बीच में छोड़ देती तो पता नहीं कब कोई दूसरा ठिकाना मिलता ? कोंट्रेक्त तीन साल का था तो रहना पड़ा |आप तो जानती ही हैं एजेंसी के कड़े नियम !मुझे अपनी बहन और जीजा को काफी पैसा चुकाना पड़ता है अपने बच्चे के बदले में |लेकिन कोई बात नहीं वो पढ़ा तो रहे हैं उसे |
बेबी भी इस्ना से अब खूब हिल गयी थी |रिशा की छुट्टियां खत्म हो चुकी थीं घर में हिडन कैमरे लग चुके थे पूरा घर बच्चों के महंगे सामान व् खिलौनों से भरा हुआ था |
‘’इस्ना तुम्हारा कोई मेल आया है इंडोनेशिया से ..एक दिन अमित ने ऑफिस से आकर टाई खोलते हुए कहा
वो अचानक चिंतित हो गयी उसके चेहरे की मुस्कराहट गायब हो गयी
सर किसका है ?नाम क्या लिखा है?उसने पूछा
मेल अंग्रेज़ी में था लिखा था कि तुमसे फोन पर ज़रूरी बात करना चाहते हैं कोई नंबर दे दो |
इस्ना कुछ देर चुप रही ....और फिर बिना कुछ कहे वहां से जाकर अपने काम में लग गयी |वो बहुत उदास थी |मोबाईल पर बात न करना एजेंसी के नियमों में शामिल था |
अपनी फेमिली से बात भी नहीं कर सकती दिस इज सच अ पनिशमेंट ..रिशा ने दुखी होकर कहा
शायद इसीलिये कि घर से आने वाले फोन से ये विचलित न हो जाएँ और काम पर असर पड़े अमित ने वजह खोजते हुए कहा
हाँ लेकिन ये तो हद दर्जे की अमानवीयता है !
कुछ देर बाद
इस्ना ?रिशा ने आवाज दी इधर आओ
वो नेपकिन से हाथ पोंछती हुई आई ..
यस मदम ...वो अब सामान्य थी
ये लो ...ये तुम्हारा मोबाईल है आज से तुम्हारे पास ही रहेगा |हमें अपने जीजा का नंबर बताओ ..रिशा ने कहा
वो कुछ देर टकटकी लगाए खोई सी रिशा अमित की तरफ देखती रही और फिर धीरे से बोली थेंक्यू सर ..थेंक्यु मैडम फिर वो अपने कमरे में चली गयी और वहां से एक डायरी लेकर आई ‘ये नंबर है सर मेरी बहन का ‘’उसने कहा
अमित ने उस नंबर को मिलाया वहां से किसी मर्द की आवाज आई जिसकी भाषा अलग थी |
लो वहां जाकर बात कर लो ..अमित ने कहा
कुछ देर बाद इस्ना आई |उसने बताया मेरे जीजा की नौकरी छूट गयी है अब उन्हें बच्चे की फीस देने में बहुत परेशानी हो रही है इसलिए मुझसे और पैसे मांगे हैं
कितने ?
दस हज़ार इन्दोनेशियन रुपिया
ठीक है हम भेज देते हैं |कहाँ भेजने हैं बताओ
और फिर अमित रिशा ने उसके जीजा के पास पैसे भेज दिए |उस दिन वो बहुत खुश लग रही थी बोली ‘’मैंने कह दिया है जीजा से कितने भी पैसे ले लो लेकिन बेटे की पढ़ाई मत छुडाना |’’
कुछ दिनों बाद उसने एजेंसी से उतने पैसे लेकर अमित को दे दिए |
मोबाईल मिल जाने के बाद भी वो बहुत कम उसका इस्तेमाल करती थी ज्यादातर फोन आते थे उसके |
‘’ इस्ना हमारे घर में मैरीज है हमें जाना है इंडिया ..तुम्हे एजेंसी होस्टल छोड़ देंगे ‘’उसने हाँ में सर हिलाया लेकिन उस दिन के बाद वो बहुत उदास रहने लगी
क्या बात है इस्ना तुम तो हमेशा हंसती खिलखिलाती रहती थीं अब उदास रहती हो?बच्चा तो ठीक है न तुम्हारा ‘’एक दिन रिशा ने उससे पूछा
हाँ ठीक है कुछ देर बाद बोली मदम एक रिक्वेस्ट है आपसे
हाँ कहो
आप इंडिया जा रहे हैं न ,मुझे प्लीज़ एजेंसी होस्टल मत छोडिये मैं यहीं घर में रह लूंगी |
लेकिन तुम तो इतनी डरपोक हो |उस दिन रात में ए सी रिपेयर करने वाला आया था तो तुम दरवाजा खोलने नहीं गयी थीं कितनी डर गयी थीं ?जबकि तुम जानती हो कि यहाँ कोई डर नहीं |
नहीं मदम ..जब आप जाओगे तो मैं अन्दर से लौक रखूंगी |एक वीक की ही तो बात है और प्लीज़ अपने इंडिया जाने की बात एजेंसी में मत बताना ?उसकी आँखों में एक अनजान सा खौफ था |
बाद में अमित के ऑफिस के दोस्त अविनाश ने बताया कि उसके यहाँ भी बर्मा की मेड है उसने एजेंसी के थ्रू ही उसे रखा है |जब वो लोग इंडिया जाते हैं तो वो भी नहीं रहना चाहती एजेंसी के होस्टल में |उसने बताया था कि वहां बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है उनके साथ |उन्हें बहुत सीमित भोजन दिया जाता है |खूब काम भी कराया जाता है |
रिशा और अमित घर इस्ना के भरोसे छोड़कर इण्डिया चले गए |वहां से जब वो उसे फोन करते तो वो खूब खुश होती |बताती कि मैंने तब से मेन गेट लौक कर रखा है |मैं ठीक हूँ ..आप लोग जल्दी से आओ मन नहीं लगता|बेबी की बहुत याद आ रही है कहते कहते उसका गला भर आता |
जिस दिन वो लोग इण्डिया से वापस सिंगापूर लौटे और घर पहुंचे इस्ना बेसब्री से उनका इंतज़ार कर रही थी |वो रिशा से लिपट गयी और बेबी को गोद में लेकर उसे खूब चूमने लगी |’’ मदम सात दिनों में आपने मेरी बच्ची को वीक कर दिया ‘’वो रिशा से बोली ‘’डोंट वारी अब हम खूब खेलेंगे ,खायेंगे मज़े करेंगे उसने बेबी से कहा |बेबी भी उसके साथ मस्त रहती उसके सामने इठलाती इतराती,रूठती ,करतब दिखाती |इस्ना उसे अपार्टमेन्ट के नीचे बने हर भरे पार्क में ले जाती जहाँ बच्चों के कई प्रकट के रंग-बिरंगे झूले,मिकी माउस का सी सौ ,और सुन्दर सी फिसलपट्टी आदि थे |इस्ना बेबी को गोद में लेकर फिसलपट्टी से फिसलती बेबी अभीभूत हो जाती |इस्ना ने बेबी को खूब सारी चीज़ें सिखा दी थीं |बेबी फ्लाईंग किस मारो मामा को ...बेबी पापा को बाय करो..ये स्पेक्सकवर उठाकर यहाँ रखो ...डॉगकैसे करता है ज़रा बताओ और बेबी जमूरे की तरह फुदक २ कर सब करके बताती |खुशी के मारे इस्ना की ऑंखें भर आतीं वो बेबी को सीने से चिपका लेती |
एक साल में बेबी का एडमिशन केयर सेंटर में करवा दिया गया लेकिन वहां सीट्स फुल थी इसलिए छः माह बाद की एंट्री मिली |इन छः माह में इसना ने बेबी को अंगरेजी में रंगों ,फूलों,पक्षियों के नाम सिखा दिए थे वो तोतली आवाज़ में जब उन्हें दोहराती तो वो निहाल हो जाती |केयर सेंटर सडक पार करके सामने वाली बिल्डिंग में ही था |इसना खुद बेबी को खूब सजा संवार कर केयर सेंटर तक छोड़ने लेने जाती थी |जब रिशा और अमित ऑफिस चले जाते तो वो काम के बीच बीच से बैठक की उस बड़े ग्लास वाली खिड़की से देखती रहती थी जहाँ से केयर सेंटर का बड़ा कॉरीडोर दिखाई देता था |एक दिन जब रिशा छुटटी लेकर घर में ही थी तब उसने इसना को किचिन में से बार बार भागते हुए बैठक के उस ग्लास विंडो में से झांकते हुए देखा |उसे कुछ शक हुआ |उसने पूछ लिया ‘’इस्ना तुम बार बार उस खिड़की में से क्या देखने जाती हो?’’
वो सकुचाती हुई सी बोली ...मदम ..थोड़ा फ़िक्र रहती है कि बेबी कहीं अकेली प्ले स्कूल से बाहर न निकल आये
तुम पागल हो क्या ?रिशा ने कहा ..वो स्कूल फर्स्ट फ्लोर पर है ..बेबी कैसे आ सकती है नीचे ...और वहां तो कितनी सीक्योरिटी है?
‘’नहीं मदम तो भी डर लगता है न ..अपनी बेबी भी कोई कम नॉटी है क्या ..सब बच्चों में सबसे स्मार्ट और चंचल है वो ...उसने गर्व से कहा |रिशा की हंसी छूट गयी |
इसना का दो साल का अनुबंध ख़त्म हो रहा था |रिशा और अमित ये जानते थे कि इस्ना बेबी और काम में इतनी मशगूल रहती है कि वो भूल ही गयी है कि अब उसके कोंट्रेक्त ख़त्म होने का समय आ रहा है और शायद वो भी भूल चुके थे कि इस्ना एक नौकरानी है |उसे हमेशा उनके साथ नहीं रहना है |उन्हें तो पता ही नहीं चलता यदि एजेंसी ऑफिस से रिमाइंडर मेल नहीं आता |
अमित ये लडकी तो एक फेमिली मेंबर जैसी हो गयी है ..मैं तो इसके बिना रहने की कल्पना ही नहीं कर सकती ..रिशा दुखी थी
सही कह रही हो..दरअसल हम बहुत डिपेंड हो गए हैं इस पर ...नहीं होना चाहिए था हमें ..स्पेशली इमोशनल डिपेंडेंसी इस मोर हार्मफुल
एक बार ये साईट खोलो ....अमित ने रिशा से कहा
क्यूँ?
एक चीज़ देखनी है
अमित ने उसी एजेंसी के रूल्स निकाले |जिसमे लिखा हुआ था कि अनुबंध बढाया भी जा सकता |देखकर दौनों की बाछें खिल गईं |
चलो अब इसना को बताने में कोई हर्ज़ नहीं |उसे ये गुड न्यूज़ भी दे देंगे कि अब तुम दो साल और यहीं रह सकती हो |कितनी खुश हो जायेगी वो?रिशा और अमित अब निश्चिन्त हो चुके थे
दूसरे दिन रविवार था |अमित रिशा देर से उठे सोकर |ब्रेकफास्ट तैयार था |गर्मागर्म सांभर बड़े और रवे का हलवा |
अरे वाह स्वीट डिश ..आज तो भाई बढ़िया सन्डे मना दिया तुमने अमित ने खुश होकर कहा |
ब्रेकफास्ट बन चुका हो तो एक बार इधर आओ इसना रिशा ने बहुत प्यार से कहा
इसना आ गयी
यहाँ बैठो कुर्सी पर
वो बैठ गयी
एक गुड न्यूज़ देना है तुम्हे
इसना निर्भाव रही बस थोडा सा मुस्कुरकार बोली क्या?
गेस करो?अमित ने कहा
बेबी का एडमिशन स्कूल में हो गया ?
नहीं और सोचो..
आपकी सेलेरी बढ़ गयी ?
नहीं ..अछा हम ही बता देते हैं ....रिशा ने उत्साह से कहा
तुम्हारा इसी घर में अगले दो साल का कोंट्रेक्त हम एक्सटेंड करा रहे हैं
रिशा को लगा कि वो खुश होकर लिपट जायेगी या मुहं पर हाथ रखकर चौड़ी ऑंखें करके आश्चर्य दिखायेगी जैसा खुशी में वो करती थी लेकिन वो निर्भाव ही रही
लेकिन ये कैसे हो सकता है?उसने कहा
क्यूँ कैसे नहीं हो सकता ?रिशा ने आश्चर्य से उसकी और देखा
वो कुछ देर चुप रही फिर वहां से उठकर किचिन में चली गयी |
मदम ...एक बात सुनिए ..उसने किचिन से रिशा को पुकारा
हाँ बोलो ..रिशा अविलम्ब किचन में गयी |
ये देखो ये मसाले सारे इस ड्रोर में रखे हैं ...नई क्रोकरी उस रैक में और पुरानी डेली यूज़ वाली यहीं नीचे रखी है |बेबी के सॉफ्ट टोयेज़ आपके कमरे की वूदन अलमीरा के ऊपर वाले खाने में रखे हैं |उन्हें फेंकना मत किसी गरीब बच्चे को दे देना |और ये आपका मोबाईल...उसने मोबाईल देते हुए कहा
रिशा को समझ में नहीं आ रहा था कि वो इस पर क्या प्रतिक्रया व्यक्त करे
रात में जब अमित ने कंप्यूटर खोला तो उसमे एक मेल था ...लिखा था
प्रिय कस्टमर
आपने इस्नावती नामक इंडोनेशियान मेड को दो वर्षों तक अपने यहाँ बेबी सिटिंग के लिए रखा |आपका आभार |कृपया फीड बैक दें कि आपका अनुभव इस्नावती के साथ कैसा रहा |आपका ये फीड बेक उसके भविष्य के लिए उपियोगी है
धन्यवाद
नीचे इसना के लिए एक मेल था लिखा था
डियर इस्नावती
तुम्हारा अनुबंध सो एन सो जिसका एड्रेस सो एन सो है के यहाँ से इस तारीख को रात आठ बजे समाप्त हो रहा है,जैसा कि पहले से निश्चित था और जैसा कि तुम चाहती थीं |ठीक पंद्रह दिनों बाद तुम्हे दुबई की एक फेमिली के नवजात शिशु की देखभाल के लिए जाना है |उन्होंने तुम्हारा बायोडाटा सलेक्ट किया है |वीसा और पासपोर्ट तैयार है |’’
जब रिशा और अमित ये मेल पढ़ रहे थे इस्ना अपना सूटकेस जमा रही थी और बेबी उसकी पीठ और कंधे पर चढ़ कर जोर जोर से बोल रही थी ...डॉग बार्कस भों भों .....योर हेयर्स आर ब्लेक ..योर शर्ट इज़ रेड....स्काय इज ब्लू ..इस्ना मुस्कुरा रही थी ...
-वंदना देव शुक्ल
मशीन ....... सच में ये मशीन ही होती हैं जब तक अनुबंध तब तक घर के मेम्बर जैसे रहती हैं उसके बाद तो जैसे कोई नाता ही न हो